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धातुपदों से मूल धातु की पहचान // लकार // पुरुष // वचन //

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धातुपदों  में से धातु की पहचान कैसे की जानी चाहिये , इसके बारे में यहां बताया गया है | इसकी मदद से मूल धातु की पहचान करना आसान हो जायेगा |आप इसे देखकर अन्य पदों का भी अभ्यास कर सकते हैं |  

सुबन्त-तिड्. प्रत्यय

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Sanskrit Learning Videos Link.

https://youtu.be/LeuC3RWAMww https://youtu.be/4dFUq325Gkk https://youtu.be/Iu3HhsBA4CU https://youtu.be/LeuC3RWAMww https://youtu.be/28jnwEXC-dw https://youtu.be/44sf6qtG_Y4 https://youtu.be/U8Iz7-9a1Ng https://youtu.be/TADJD3gGrDI

बालक शब्दरुप ॥अकारान्त पुल्लिंग॥

प्यारे बच्चों! आपके लिए अकारान्त पुल्लिंग का एक उदाहरण! इसी आधार पर आप अन्य शब्दरुप समझ सकते हैं। बालक शब्दरुप वचन à विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा बालकः एक बालक ने बालकौ दो बालकों ने बालकाः कई बालकों ने द्वितीया बालकम् एक बालक को बालकौ दो बालकों को बालकान् कई बालकों को तृतीया बालकेन एक बालक से, के द्वारा बालकाभ्याम् दो बालकों से, के द्वारा बालकैः कई बालकों से, के द्वारा              चतुर्थी बालकाय एक बालक के लिए बालकाभ्याम् दो बालकों के लिए बालकेभ्यः कई बालकों के लिए पंचमी बालकात् एक बालक से (अलग होने के अर्थ में) बालकाभ्याम् दो बालकों से (अलग होने के अर्थ में) बालकेभ्यः कई बालकों से (अलग होने के अर्थ में) षष्ठी बालकस्य एक बालक का, के, की ...

संस्कृत सीखो ..super modern बनो!

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One of the greatest thinkers Sri Aurobindo writes that, “Sanskrit language is the most magnificent, the most perfect, the most prominent and wonderfully sufficient literary instrument developed by the human mind.” संस्कृत सीखकर क्या होगा? इसमें career options क्या हैं? जैसे सवाल पुराने हो गए। संस्कृत मृत भाषा ( dead language ) है! जैसी धारणा भी पुरानी हो चुकी है। संस्कृत को हेय दृष्टि से देखना out dated हो चुका है। अब समय है संस्कृत को अपने जीवन में अपनाने का! जरा सोचो बाईबिल पढने वाले अंग्रेजी जानते हैं। कुरान पढने वाले उर्दू जानते हैं। तुम्हें संस्कृत नहीं आती तो अपने धर्म ग्रन्थों को कैसे पढोगे? अपने धर्मग्रन्थों को नहीं पढोगे तो वैचारिक समृद्धि कहाँ से आयेगी? विचार ही नहीं होंगे तो संस्कार कहाँ से आयेगा? संस्कार नहीं होंगे तो अपना जीवन उन्नत कैसे बनाओगे? समाज पतन के गर्त में गिरता चला जायेगा। और फिर हमारे पास बचेगा क्या? Swami vivekanand once wrote, “The very sound of Sanskrit gives prestige and power and strength to mankind.” आज तो विदेशों में भी संस्कृत...